शनिवार, 1 अक्टूबर 2011
रविवार, 25 सितंबर 2011
हाल-ऐ-दिल
मंगलवार, 20 सितंबर 2011
क्यूँ
क्यूँ भीड़ में भी हर पल एक अजीब सी तन्हाई है
दिलो दिमाग पर मेरे एक उदासी छाई है
क्यूँ सुनने लगा हु आज कल मैं अपनी ही धडकनों का शोर
क्या यूँही चलती प्यार की पहली पुरवाई है |||
क्यूँ तेरे तस्सवुर में डूबी रहती है तनहा मेरी हर रातें
क्यूँ में अकेले में करता हूँ खुद से इतनी सारी बातें
क्या हो रहा है मुझको मुमकिन नहीं है बताना की
क्यूँ रह रह के याद आती है तेरी मेरी वो हसीं मुलाकातें ||
क्यूँ हर रंग रूप में मुझे बस तेरा ही अक्स दिखता है
क्यूँ इन वादियों इन फिजाओं में छाया तेरा ही नूर लगता है
बेशक जो हाल है मेरे दिल का वो मेरा कसूर है लेकिन
क्यूँ कल तक ये दिल जो मेरा था आज वो तेरा लगता है||
क्यूँ तुमसे इतना प्यार हुआ की खुद से बेवफा बन गए
क्यूँ हर चीज़ थी मेरे पास पर तुम दर्दे जिगर दे गए
क्यूँ बेखुदी तेरे प्यार की छाई है मुझे पे इस तरह
की तेरी चाहत में हम खुद को फ़ना कर गए ||
बुधवार, 31 अगस्त 2011
मैं
शुक्रवार, 26 अगस्त 2011
पहली मुलाकात
शुक्रवार, 5 अगस्त 2011
दोस्त
रविवार, 31 जुलाई 2011
मंगलवार, 26 जुलाई 2011
भारत
यहाँ सर पे मुकुट,पाँव में जलज और दिल में बहती गंगा है
जीवन की डगर मुश्किल है यहाँ जन-जीवन भूखा नंगा है
फिर भी लोगों के दिलों में यहाँ बहे खून की जगह तिरंगा है ||
बापू का कफ़न , चाचा का तिलक ,आज़ाद ने खून दे सींचा है
चाहत की कलि खिलती है यहाँ खुशियों से भरा ये बगीचा है ||
है स्वर्ग यही जन्नत है यहाँ ,हर जीव यहाँ पर जीता है
हर नर में यहाँ पर राम बसे , नारी में बसीं यहाँ सीता है ||
चरित्र दिखा रामायण से , जीवन को बताती गीता है
भक्ति को सिखा हनुमत ने यहाँ भगवान् को सबसे जीता है ||
सूरज भी जिसे करता है नमन , और जलधि चरण को धोता है
देवों की धरा इस धरती को , ये जग पाने को रोता है||
अब देश मुझे वो लगता नहीं शायद जो पहले दिखता था
थी राम राज्य की सोंच मगर , हर पल यहाँ रावन दिखता है ||
साधारण जन की बात क्या हो , हर ख्वाब यहाँ पर बिकता है
था प्यार कभी संसार यहाँ , अब प्यार यहाँ पर बिकता है ||
ये वक़्त हमारा है अब से , कर्त्तव्य हमारा होता है
करना है मुक्त गरीबी से , बनना हमे विश्वविजेता है ||
आओ अब हम सब प्राण ये लें , हो राष्ट्र सेवा जीवन अपना
कर्त्तव्य परायण हो हम सब , करें देश का हर पूरा सपना ||
बुधवार, 20 जुलाई 2011
मंगलवार, 19 जुलाई 2011
कुछ बातें
कुछ बातें थी जो अपनी वो बातें पीछे छूट गईं
खट्टी मीठी आवाजों की बस यादें हममे छूट गईं
तुमसे न बिच्चादने की चाहत हर लम्हा दिल बसी रही
जीवन क कटीं संगर्ष में अब तेरी आहात पीछे छूट गईं ||
वो काली काली सी आखें जो हमसे बातें करती थीं
जब चले प्रेम की पुरवाई ख़ामोशी बातें करती थीं
कुछ न कह कर सब कहती थीं जब हमसे रूठा करतीं थीं
वो प्यार भरी वो मस्तानी जो रातें थीं वो छूट गईं ||
जब यारों का था संग हमे ख़ामोशी हमसे डरती थी
खुशियाँ रहती हर दिल में तब आखें न किसी की रोतीं थीं
चुप कभी नहीं रहता था मैं प्रेषण सभी को करता था
वो चिल्लाने वो गुर्राने की आदत थी वो छूट गई ||
शुक्रवार, 6 मई 2011
यादें
शनिवार, 30 अप्रैल 2011
क्यूँ
शनिवार, 22 जनवरी 2011
आशिकी
पहला प्रभाव
वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...
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चार पल की ये कहानी है हमारी ज़िन्दगी उड़ता बादल बहता पानी है हमारी ज़िन्दगी चाहतो का है भरा सैलाब हर एक पल यहाँ जी लो जी भर के सुहानी है ...
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एक उनकी ख्वाहिशों में हम जमाना भूल बैठे हैं मोहब्बत के सफर में हम ठिकाना भूल बैठे हैं।। जो उनके साथ बीते हैं वो लम्हे याद हैं अब भी बिना...
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जब से मिले हो तुम , सब बदल गया है जैसे कि अब जग झूठ और तेरा प्यार सच्चा लगता है और यूँ तो बहुत बड़बोले थे हम मगर अब चुप-चाप तेरे करीब रहन...