याद रखो तो इक निशानी हूँ मैं
खो दो तो इक कहानी हूँ मैं
समुन्दर की लहरों सा चंचल या
ठहरा हुआ पानी हूँ मैं
जीवन की भाग दौड़ में
हर दम लड़ता हुआ इक सेनानी हूँ मैं
कवी की कल्पना सा अद्भुत
या पंछियों सा आज़ाद प्राणी हूँ मैं
याद रखो तो इक निशानी हूँ मैं
खो दो तो इक कहानी हूँ मैं |
जीवन रूपी रेगिस्तान में
प्यार की तलाश में
दर दर भटकता एक सैलानी हूँ मैं
हँसना हँसाना काम है मेरा
शायद किसी जोकर की कहानी हूँ मैं
चाहत में जान तक लुटा दे जो
किसी ऐसे आशिक की जवानी हूँ मैं
ख़ुशी क लम्हे और गम के पल
रोक न पायें जिन्हें
आँखों में बहता वो पानी हूँ मैं
याद रखो तो इक निशानी हूँ मैं
खो दो तो इक कहानी हूँ मैं ||
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें