हर बात ख़ुशी की थी उस पल ,हर बात सुहानी लगती थी ,बस प्यार भरा था गुलशन में ,हर रात सुहानी लगती थी |इकरार कभी करते तुझसे , इनकार भी खुद से करते थेतेरे साथ बिताते हर पल की वो याद सुहानी लगती है |उम्मीद तुझी से थी अपनी , विशवास भी तुझपे करते थे ,कुछ बात अजब सी जब होती , बस नाम तुम्हारा लेता थे |जब याद कभी घर की आती , बाहों में तुम्हे भर लेते थे ,तब प्यार तेरा पाकर खुद को नींदों में कहीं खो देते थे |परिवार बना था कुछ अपना जब दूर हम घर से रहते थे ,हर सुख क पल हम साथ जिए , दुःख को हम बांटा करते थे |जब प्यार किसी से होता था , तब यार चिढाने लगते थेफिर छोड़ क जाने के उसके सब मिल क सुनांने लगते थे ||हर पल में सदी हम जीते थे , हर नाव पुराणी लगती थीतुम साथ मेरे जब तक रहते , मझधार पुराणी लगती थी |ये बात नहीं सोंची उस पल ऐसा भी इक दिन आता हैजब छोड़ के जाना तुम सब को मरने के बराबर लगता है |रोने को तरसता है ये मन आँखों में भी पानी रहता हैपर तोड़ नहीं सकता खुद को ये बांध पुराना लगता है |ये बात कोई कल्पना नहीं , मेरे दिल की कहानी कहते हैजब रात के साए मुझसे तेरी यादों की कहानी कहते है |भगवान् मेरा मुझे माफ़ करे , ये पाप मैं ऐसा करता हूँउपर वाले से भी ज्यादा मैं तुझपे भरोसा करता हूँ |उम्मीद यही ये दुआ है मेरी तेरा साथ मुझे हर बार मिलेजिस मुल्क जियूं में जहाँ भी रहूँ , बस तेरे जैसा यार मिले |ये बात यहाँ रूकती ही नहीं बड़ी दूर तलक ये जाती है ,तेरे साथ की खुशबू यार मेरे जीवन को स्वर्ग बनती है ||
शुक्रवार, 6 मई 2011
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