खरीदारी है ईमान की रवादारी मिलती कहाँ है?
ये सियासत है यहाँ वफादारी मिलती कहाँ है?
गलतियाँ हो जाती है लड़कों से सुनते हैं हम मगर
लड़कियों को यहाँ पहरेदारी मिलती कहाँ है?
जब कभी निकलतीं हैं वो सड़कों पर अपने हक की खातिर
लाठियाँ मिलती हैं उन्हें जवाबदारी मिलती कहाँ है?
कैसे किसी रिश्ते पर यकीन करें वो लोग "आखिर"
इतने वहशी माहौल में अब समझदारी मिलती कहाँ है?
।।आखिर।।