शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

दोस्त

ज़िन्दगी है यूँ नशीली बिन पिए चढ़ जाती है
दोस्त जैसी ये दुआ बिन कुछ कहे मिल जाती है
होती है ऐसे मुकम्मल फिर हमारी ज़िन्दगी
राह की मुश्किल हमे खुद राह दे कर जाती है
होता है मुश्किल बड़ा जीना बिना इसके ये पल
साथ हो गर ये तो इक पल मौत भी रुक जाती है ||

छु सके हमको तन्हाई ये गंवारा है नहीं
कर सके कोई दुखी इनको गंवारा है नहीं
ये फ़रिश्ते है ज़मीं के है खुदा इनमे बसा
है अगर जो दोस्ती तो है इबादते खुदा ||

कहता है मुझेसे खुदा कि मिल नहीं सकता मैं रोज़
पर बना कर दोस्त मिलता है वो मुझसे हर जगह
प्यार बरसता है मुझपे मैं मिलूं उसे जिस जगह
पाकर इसको खो न देना न कोई इसकी तरह
है अगर ये पास तो बनता है मधुर जीवन मेरा ||

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