मंगलवार, 26 जुलाई 2011

भारत

देश मेरा ये देश हसीं दुनियां में सबसे चंगा है

यहाँ सर पे मुकुट,पाँव में जलज और दिल में बहती गंगा है

जीवन की डगर मुश्किल है यहाँ जन-जीवन भूखा नंगा है

फिर भी लोगों के दिलों में यहाँ बहे खून की जगह तिरंगा है ||

बापू का कफ़न , चाचा का तिलक ,आज़ाद ने खून दे सींचा है

चाहत की कलि खिलती है यहाँ खुशियों से भरा ये बगीचा है ||

है स्वर्ग यही जन्नत है यहाँ ,हर जीव यहाँ पर जीता है

हर नर में यहाँ पर राम बसे , नारी में बसीं यहाँ सीता है ||

चरित्र दिखा रामायण से , जीवन को बताती गीता है

भक्ति को सिखा हनुमत ने यहाँ भगवान् को सबसे जीता है ||

सूरज भी जिसे करता है नमन , और जलधि चरण को धोता है

देवों की धरा इस धरती को , ये जग पाने को रोता है||

अब देश मुझे वो लगता नहीं शायद जो पहले दिखता था

थी राम राज्य की सोंच मगर , हर पल यहाँ रावन दिखता है ||

साधारण जन की बात क्या हो , हर ख्वाब यहाँ पर बिकता है

था प्यार कभी संसार यहाँ , अब प्यार यहाँ पर बिकता है ||

ये वक़्त हमारा है अब से , कर्त्तव्य हमारा होता है

करना है मुक्त गरीबी से , बनना हमे विश्वविजेता है ||

आओ अब हम सब प्राण ये लें , हो राष्ट्र सेवा जीवन अपना

कर्त्तव्य परायण हो हम सब , करें देश का हर पूरा सपना ||

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