एक अँधेरे में थी ये मेरी ज़िन्दगी
तुम अगर आओ तो रोशनी आएगी
पूरी की पूरी थी ये तो बिखरी हुई
तेरे आने से थोड़ी संवर जायेगी
जाने कितने ही सावन अकेले गए
भूल कर भी न रंगों को मैं छु सका
अबके फाल्गुन अगर तुम इधर आओगे
मेरी होली ज़रा सी संवर जायेगी ॥
मैं तो बंज़र ज़मीं सा था सूखा हुआ
तेरे आने से इसमें नमी आएगी
ठूंठ कि तरह मैं कब से तनहा खड़ा
तेरे आने से कुछ कोपलें आएँगी
बारिशों ने मुझे जाने कब था छुआ
सूखे रंगों सा मैं तनहा उड़ता रहा
गर घटा बनके अब तू बरस जायेगी
मेरी होली ज़रा सी संवर जायेगी ॥
आज कल रात में नींद आती नहीं
तेरे आने से सपने भी आ जायेंगे
चाँद भी बादलों में था छुपता रहा
तेरे आने से फिर चांदनी आएगी
दिल परेशां था मैं भी हैरान था
तुमको देखा तो इसमें उमंगें उठीं
सोचता हूँ अगर मुझको चाहोगे तुम
प्यास मेरी मोहब्बत कि बुझ जायेगी
गर कभी भूल कर तुम इधर आओगे
मेरी होली ज़रा सी संवर जायेगी ॥
॥आखिर॥
तुम अगर आओ तो रोशनी आएगी
पूरी की पूरी थी ये तो बिखरी हुई
तेरे आने से थोड़ी संवर जायेगी
जाने कितने ही सावन अकेले गए
भूल कर भी न रंगों को मैं छु सका
अबके फाल्गुन अगर तुम इधर आओगे
मेरी होली ज़रा सी संवर जायेगी ॥
मैं तो बंज़र ज़मीं सा था सूखा हुआ
तेरे आने से इसमें नमी आएगी
ठूंठ कि तरह मैं कब से तनहा खड़ा
तेरे आने से कुछ कोपलें आएँगी
बारिशों ने मुझे जाने कब था छुआ
सूखे रंगों सा मैं तनहा उड़ता रहा
गर घटा बनके अब तू बरस जायेगी
मेरी होली ज़रा सी संवर जायेगी ॥
आज कल रात में नींद आती नहीं
तेरे आने से सपने भी आ जायेंगे
चाँद भी बादलों में था छुपता रहा
तेरे आने से फिर चांदनी आएगी
दिल परेशां था मैं भी हैरान था
तुमको देखा तो इसमें उमंगें उठीं
सोचता हूँ अगर मुझको चाहोगे तुम
प्यास मेरी मोहब्बत कि बुझ जायेगी
गर कभी भूल कर तुम इधर आओगे
मेरी होली ज़रा सी संवर जायेगी ॥
॥आखिर॥