तन्हाई का आलम था जब पहली बार मिले थे हम
रिम-झिम गिरता सावन था जब पहली बार मिले थे हम
बारिश कि बूंदों ने हम दोनों को खूब भिगाया था
यूँ भीगे-भागे , सहमे से पहली बार मिले थे हम ॥
दिल में थे जज़्बात मगर हर लम्हे में खामोशी थी
तुम भी चुप थी मैं भी चुप था जाने का मदहोशी थी
मैं तुमको जब एक टक देखूं तो तुम शरमा जाती थी
ऐसे में जब बदल गरजे तो तुम घबरा जाती थी
कैसा वो आलम था जब एक दूजे में खोये थे हम
और भूला था मैं जग को जब पहली बार मिले थे हम ॥
तुम गुलाब की पंखुड़ी जैसी मैं भवरे सा था मूरख
बाकि सब मैं भूल गया जब से देखी तेरी सूरत
पानी कि बूँदें थीं तुम पर मोती जैसी चमक रहीं
कनक कलेवर में भीगी सी खजुराहो कि तुम मूरत
काले बदल के घिरने पर , बिजली जैसी थी चमकी तुम
चकाचौंध ये आँखें थी , जब पहली बार मिले थे हम ॥
फिर तुम जाने लगी , अचानक मुझको ये एहसास हुआ
कल तक मेरा दिल था , मेरा अब वो तेरे पास हुआ
दूर गयी जब तुम तो मेरे दिल एक कसक उठी
फिर लौटी तुम , लगी गले , तो जीवन का एहसास हुआ
पुरबइया और पछिया जैसे उस सावन में साथ मिले
हुई मोहब्बत मुझको भी यूँ अब हम पहली बार मिले ॥
रिम-झिम गिरता सावन था जब पहली बार मिले थे हम
बारिश कि बूंदों ने हम दोनों को खूब भिगाया था
यूँ भीगे-भागे , सहमे से पहली बार मिले थे हम ॥
दिल में थे जज़्बात मगर हर लम्हे में खामोशी थी
तुम भी चुप थी मैं भी चुप था जाने का मदहोशी थी
मैं तुमको जब एक टक देखूं तो तुम शरमा जाती थी
ऐसे में जब बदल गरजे तो तुम घबरा जाती थी
कैसा वो आलम था जब एक दूजे में खोये थे हम
और भूला था मैं जग को जब पहली बार मिले थे हम ॥
तुम गुलाब की पंखुड़ी जैसी मैं भवरे सा था मूरख
बाकि सब मैं भूल गया जब से देखी तेरी सूरत
पानी कि बूँदें थीं तुम पर मोती जैसी चमक रहीं
कनक कलेवर में भीगी सी खजुराहो कि तुम मूरत
काले बदल के घिरने पर , बिजली जैसी थी चमकी तुम
चकाचौंध ये आँखें थी , जब पहली बार मिले थे हम ॥
फिर तुम जाने लगी , अचानक मुझको ये एहसास हुआ
कल तक मेरा दिल था , मेरा अब वो तेरे पास हुआ
दूर गयी जब तुम तो मेरे दिल एक कसक उठी
फिर लौटी तुम , लगी गले , तो जीवन का एहसास हुआ
पुरबइया और पछिया जैसे उस सावन में साथ मिले
हुई मोहब्बत मुझको भी यूँ अब हम पहली बार मिले ॥