शनिवार, 24 मार्च 2012
आशिकी
रविवार, 4 मार्च 2012
इश्क
माना तेरी नज़रों में गुनाहगार हूँ मैं
शायद तेरे ख्यालों में आज भी सवार हूँ मैं
चाहा बहुत की खत्म कर दूँ ये सिलसिला मोहब्बत का तुझसे
पर कम्बखत आज भी तेरी चाहत में गिरफ्तार हूँ मैं||
गिरफ्तार हूँ तेरी बातों में या तेरी आँखों में न जानूं मैं
इक तेरे सिवा किसी भी चेहरे को न पहचानूँ मैं
कितनी मोहब्बत है तुझसे कैसे करूँ बयां
की तेरे साथ इक पल जीने को ख़ुशी से मर जाऊं मैं ||
तू इस कदर मेरे ख्यालों में हर रोज़ आती है
न जाने इस दिल को कितना तडपाती है
की बयां नहीं कर सकता उस दर्द की दास्तान को
जब नासूर बन के तेरी याद इस दिल को आती है ||
कहता हूँ नासूर जिसे शायद मेरा ख्याल है
मेरे होठों पर आज भी वही सवाल है
की क्या खता हुई हमसे जो ये सजा मिली
कि तेरे तस्सव्वुर में खो कर आज भी ये दिल बेहाल है ||
पहला प्रभाव
वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...
-
चार पल की ये कहानी है हमारी ज़िन्दगी उड़ता बादल बहता पानी है हमारी ज़िन्दगी चाहतो का है भरा सैलाब हर एक पल यहाँ जी लो जी भर के सुहानी है ...
-
एक उनकी ख्वाहिशों में हम जमाना भूल बैठे हैं मोहब्बत के सफर में हम ठिकाना भूल बैठे हैं।। जो उनके साथ बीते हैं वो लम्हे याद हैं अब भी बिना...
-
जब से मिले हो तुम , सब बदल गया है जैसे कि अब जग झूठ और तेरा प्यार सच्चा लगता है और यूँ तो बहुत बड़बोले थे हम मगर अब चुप-चाप तेरे करीब रहन...