शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

पहली मुलाकात

कुछ यूँ उनसे मेरी मुलाकात हुई
बिन मौसम ही बरसात हुई
अलफ़ाज़ मिले न हमे उस पल
आँखों आँखों में बात हुई
बरसात हुई और बात हुई
यूँ पहली मुलाकात हुई ||

बिन सोचे हर इक बात हुई
यूँ पहली मुलाकात हुई
फिर हर इक छान और हर लम्हा
बस चाहत की बरसात हुई
यूँ पहली मुलाकात हुई
यूँ पहली मुलाकात हुई ||

आज़ाद सा पंछी था ये दिल
इक लम्हे में फिर रात हुई
आँखों में बसी तेरी सूरत
जाने कसी ये बात हुई
सपने थे मेरे कुछ और मगर
हर सपने में तुम साथ हुई
यूँ पहली मुलाकात हुई
यूँ पहली मुलाकात हुई ||

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

पहला प्रभाव

वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...