बुधवार, 31 दिसंबर 2014

Happy New Year

अभी चलते-चलते एक और दिन बीत जाएगा
अपने दामन में समेटे अनगिनत लम्हे ले जायेगा
कही गिरते हुए आंसू कहीं हँसते हुए चेहरे
हर एक बन्दे के जीवन में ये यादें छोड़ जायेगा ॥

कोई उन यादों को सिरहाने रख आंसू बहायेगा
कोई तन्हाइयों में याद कर उन्हें , मुस्कुराएगा
समय के साथ ये मुस्कान , आंसू छुप से  जायेंगे
मगर जीवन समय सा ही सदा चलता ही जायेगा ॥

चलो आओ करें कुछ नया हम अबके साल में
ज़रा सा भूल जाए यादों को हम अबके साल में
हर एक मज़हब को दे सम्मान अब हम अबके साल में
ज़रा सा तो लगें इंसान हम अब अबके साल में
किसी इज़्ज़त पे आये आंच न इस अबके साल में
कोई भुखमरी से ना मरे इस अबके साल में
करे हम कुछ नया अपने लिए पर याद ये रखें
बढ़ाएं मान और सम्मान वतन का अबके साल में ॥

॥आखिर॥ 

गुरुवार, 25 दिसंबर 2014

ज़मीं का एक टुकड़ा जो हमे बुद्धू बनता है
कभी मुस्लिम बनता है कभी हिन्दू बनता है ॥
इक उसके मोह में फंस कर प्रभु का नाम लेकर के
कोई मंदिर गिरता है कोई मस्जिद गिरता है ॥
नहीं मिलना है तुझको कुछ नहीं मिलना मुझे कुछ भी
ये टुकड़ा सिर्फ हमको खून का प्यास बनाता है ॥
बहाकर के लहू मासूमों का इस व्यर्थ की ज़िद में
ये टुकड़ा एक ज़ालिम को यहाँ नेता बनता है ॥

॥आखिर॥

मंगलवार, 23 दिसंबर 2014

ए मोहब्बत ! आओ जीने का ये सलीका कर लें
कि खो जाए हम एक दूजे में गैरों से तौबा कर लें
यूँ तो कई उम्र बितायी है मैंने,तुम बिन तनहा मगर
अब ऐसे जिए हम की हर पल को अपना कर लें ॥

॥आखिर॥ 

शनिवार, 20 दिसंबर 2014

चले आओ इधर की अब वहां रहना नहीं है
दरिंदों से भरी दुनिया में अब जीना नहीं है
हरी अब आ भी जाओ और करो संघार दुष्टों का
कि इनकी वहशियत की अब कोई सीमा नहीं है ॥

॥आखिर॥ 

शनिवार, 6 दिसंबर 2014

बहुत खुदगर्ज होती जात है इन हुक्मरानों की
बमुश्किल ही किसी मसले पर इनको दर्द होता है
लहू बहता है सीमा पर जवानों का तो बहने दो
इन्हे कुर्सी से मतलब है सियासत फ़र्ज़ होता है ॥

वो एक निर्जीव सी गोली भी मज़हब भूल जाती है
जब भी चलती है सरहद का सीना छील जाती है
हसूँ बुद्धि पर मैं इनकी या दू दाद ए "आखिर"
जो जाकर के शहीदो में भी मज़हब ढूंढ लाती है
चुनावों का महीना जब कभी आता है दिल्ली में
ये हिन्दू ढूंढ लाती है , ये मुस्लिम ढूंढ लाती है ॥

॥आखिर॥ 

पहला प्रभाव

वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...