हर शाम दिल में तन्हाई थी
मन तो खुश था मगर
दिल में एक उदासी सी छाई थी
जाने कितने दिनों पर
चली वो पुरवाई थी
न जाने कितनी मुद्दतो क बाद
याद तुझे मेरी आई थी|
न जाने कब से था
दिल को इंतज़ार तेरा
हर दिन रहता ये बेचैन
हर पल बेक़रार बड़ा
भंवरे का गुंजन था नीरस
फूलों में ज़हर भरा |
पर तुझे याद कर गुजारे थे
ये दिन और ये रात
और तेरी याद में बीते
न जाने कितने बरसात
पर तेरी खबर न आई
फिर भी था एक विश्वास
तुझसे मिलने की थी
मेरे होठों पे अधूरी प्यास |
पर उस विश्वास से भी
नाता टूट गया था
जब से हिचकियो ने भी मेरा दामन
छोड़ दिया था ||
पर आज एक उम्मीद की किरण
फिर से जग आई है
आज फिर से मुझे
हिचकियाँ आई है
आज मन भी खुश है मेरा
और दिल में बजी शहनाई है
भवरों को गुंजन में मिठास
और फूलों में खुशबु भर आई है
ऐसा लगता है जीवन में मेरे
खुशियाँ फिर से भर आई है
और आज ऐसा लगता है ज़ालिम कि
फिर से तुझे मेरी याद आई है |||
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