मंगलवार, 18 दिसंबर 2012
सोमवार, 17 दिसंबर 2012
रविवार, 9 दिसंबर 2012
life as visible to me...:)
ज़िन्दगी में हर कदम पर रोशंनी नहीं होती
तन्हाइयां भी है यहाँ , सिर्फ महफिलें नहीं होती
लोग तो मिलते है, सबसे बंदगी नहीं होती
अरे ज़िन्दगी तो हर कदम पर, जूझने का नाम है
जो कटे आराम से वो ज़िन्दगी नहीं होती ।।
गुरुवार, 6 दिसंबर 2012
बुधवार, 21 नवंबर 2012
मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012
सोमवार, 29 अक्टूबर 2012
शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2012
क्या है?
बुधवार, 10 अक्टूबर 2012
सोमवार, 1 अक्टूबर 2012
Love.....
सोमवार, 17 सितंबर 2012
शुक्रवार, 14 सितंबर 2012
गुरुवार, 6 सितंबर 2012
बुधवार, 22 अगस्त 2012
शनिवार, 14 जुलाई 2012
दर्द-ए-दिल
कल और अब
शुक्रवार, 15 जून 2012
शुक्रवार, 1 जून 2012
बुधवार, 30 मई 2012
बड़ी मुश्किल में पड़ता दिल इसे जब प्यार होता है
निगाहों को तस्सव्वुर बस तेरा हर बार होता है
मज़ा तब आंसुओं का है बशर्ते जान पाए तू
ये आंसू बस तुम्हारे साथ का अरमान होता है
नजाकत प्यार की कितनी भी अच्छी हो भले ज़ालिम
जो न हो साथ तू तो बस वही नासूर होता है
और हर इक फूल पर मंडराने वाले भंवरे क्या जाने
बड़ी मुद्दत से दुनिया में किसी से प्यार होता है ||
♥
शुक्रवार, 25 मई 2012
रविवार, 13 मई 2012
माँ
बुधवार, 25 अप्रैल 2012
शनिवार, 21 अप्रैल 2012
बुधवार, 18 अप्रैल 2012
इज़हार-ऐ -मोहब्बत
कुछ वक़्त का तकाजा था , कुछ मौसम-ए-दस्तूर
तू थी दिल के पास मगर , फिर भी मुझसे दूर
पर एहसास एक हसीं मेरा तुझमे गहरा था
भूल नहीं सकता उस पल को मैं जब
तेरी आँखों में सजा शर्म का सुर्ख पहरा था
तू चुप थी मगर आँखें तेरी हर बात कह गयी
जो दिल में थी छुपी तेरे हर राज़ कह गयी
कि कितनी मोहब्बत है तुझे मुझसे जहान में
न चाहते हुए भी तू मुझे ये बात कह गयी ||
बातें हुई इशारों में कोई सुन न भी सका
तेरी आँखों ने जब कहा तो मैं इकरार कर सका
हाँ है मोहब्बत मुझको तेरे नाम से यहाँ
जो तुझसे है जुदा उस हर इक काम से यहाँ
है चाह ये मेरी की बस एक तू मिले मुझे
तेरे साथ सा मुक्कदस सहारा यूँ मिले मुझे
कि कट जाएँ हर इक पल मेरा तेरी पनाह में
और मौत जब मिले तो तेरे साथ ही यहाँ ||
मंगलवार, 3 अप्रैल 2012
दिल चाहता है
आज फिर तुमसे मिलने को दिल चाहता है
निगाहों में खिलने को दिल चाहता है
गुस्ताखियाँ तो बहुत की थी मैंने
मनमानी करने को दिल चाहता है ||
मोहब्बत की कुछ ये कहानी अजब है
अदाओं में पायी नयी ज़िन्दगी है
इशारों-इशारों में बातें क्या कर दी
निगाहें मिलाने को दिल चाहता है ||
तसव्वुर है तेरा तेरी बात है यूँ
की भूला जहाँ मैं नहीं याद खुद को
तेरी बातों ने ऐसा जादो किया है
की फिर झिलमिलाने को दिल चाहता है ||
तनहाइयाँ थी बहुत ज़िन्दगी में
थे गम मुझपे भरी, ख़ुशी मुझसे रूठी
तेरी चाहतों का असर कुछ हुआ यूँ
की फिर मुश्कुराने को दिल चाहता है ||
शनिवार, 24 मार्च 2012
आशिकी
रविवार, 4 मार्च 2012
इश्क
माना तेरी नज़रों में गुनाहगार हूँ मैं
शायद तेरे ख्यालों में आज भी सवार हूँ मैं
चाहा बहुत की खत्म कर दूँ ये सिलसिला मोहब्बत का तुझसे
पर कम्बखत आज भी तेरी चाहत में गिरफ्तार हूँ मैं||
गिरफ्तार हूँ तेरी बातों में या तेरी आँखों में न जानूं मैं
इक तेरे सिवा किसी भी चेहरे को न पहचानूँ मैं
कितनी मोहब्बत है तुझसे कैसे करूँ बयां
की तेरे साथ इक पल जीने को ख़ुशी से मर जाऊं मैं ||
तू इस कदर मेरे ख्यालों में हर रोज़ आती है
न जाने इस दिल को कितना तडपाती है
की बयां नहीं कर सकता उस दर्द की दास्तान को
जब नासूर बन के तेरी याद इस दिल को आती है ||
कहता हूँ नासूर जिसे शायद मेरा ख्याल है
मेरे होठों पर आज भी वही सवाल है
की क्या खता हुई हमसे जो ये सजा मिली
कि तेरे तस्सव्वुर में खो कर आज भी ये दिल बेहाल है ||
गुरुवार, 26 जनवरी 2012
हिन्दुस्तान
कुछ कहानी है है अजब , कितनी गजब है दास्ताँ
मुश्किलें सब छंट गयीं , न मिट सका इसका निशान
बाजु-ऐ-कातिल की भी होगी अधूरी दास्तान
गर नाम न होगा शहीदों का kahani में बयां
जो हो गए कुर्बान हंस कर इक सवेरा लाने को
की जी सकें निश्चिन्त हम , आज़ाद हो हिन्दुस्तान ||
राह थी मुश्किल बड़ी , कांटे बीचे हर डग यहाँ
नंगे पाव थे चले ऐसे थे वीर नौजवान
राह थी जिसने दिखाई देश को आज़ादी थी
खुद लतियों का ले सहारा चलता था बापू महँ ||
हर वर्ग था शामिल जब जश्न-ऐ-आज़ादी मानाने को
तब देश के दुश्मन बना बैठे नया हिन्दोस्तान
है मुल्क वो अपना मगर जाने वो क्या है सोचता
की दुश्मन-ऐ-हिन्दोस्तान बन बैठा है वो अब यहाँ
न जीता है वो खुद वहां न जीते है हम अब यहाँ
न जाने कब किस मोड़ पे वो छोड़ दे अपना निशान ||
यूँ तो मिल्ली आज़ादी पर क्या सच में हम आज़ाद है
आदमी तो आदमी , है सोच का शोषण यहाँ
भ्रस्त है सब लोग जाने कैसा ये गणतंत्र है
की आदमी को आदमी है काटता हर पल यहाँ ||
अब भी समय है रहनुमाओं जाग जाओ तुम यहाँ
तो भी मुक्कमल हो सकेगा गणतंत्र का सपना यहाँ
वरना उठेंगी आंधियां हुंकार होगा फिर जवान
और फिर बनेगा देश में कोई भगत ,तो कोई बापू महान
फिर लाज तुम अपनी बचा पाओगे न उस पल यहाँ
जब देश का होकर न पाओगे दो गज मिटटी यहाँ ||
बात है इतनी की अब जागो उठो कुछ तो करो
की बन सके गणतंत्र प्यारा न्यारा अपना ये जहाँ
घूम लो दुनिया भले जितनी भी लेकिन ये सुनो
सरे जग में है नहीं कोई दोसरा हिन्दोस्तान ||
Happy Republic Day...
पहला प्रभाव
वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...
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चार पल की ये कहानी है हमारी ज़िन्दगी उड़ता बादल बहता पानी है हमारी ज़िन्दगी चाहतो का है भरा सैलाब हर एक पल यहाँ जी लो जी भर के सुहानी है ...
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एक उनकी ख्वाहिशों में हम जमाना भूल बैठे हैं मोहब्बत के सफर में हम ठिकाना भूल बैठे हैं।। जो उनके साथ बीते हैं वो लम्हे याद हैं अब भी बिना...
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जब से मिले हो तुम , सब बदल गया है जैसे कि अब जग झूठ और तेरा प्यार सच्चा लगता है और यूँ तो बहुत बड़बोले थे हम मगर अब चुप-चाप तेरे करीब रहन...