सोमवार, 25 फ़रवरी 2013



निगाहों में तेरी चाहत के नगमे यूँ भरे कबसे 
जो आयीं बारिशों की रुत तुझे सुनने को ये तरसें 
तेरी पायल की रुन-झुन जब कभी इस दिल में बजती है 
तेरे इक दर्श को आँखें मेरी कुछ यूँ तरसती है 
की आ भी जा मेरे हमदम अगर चाहत है कुछ मुझसे 
किन बिन मौसम भी ये आँखें मेरी ऐसे बरसती है 
नज़ारा देख कर के लोग बस ये बात कहते हैं 
की शम्मा आज भी कातिल है बस परवाने जलते हैं ||

गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013


एक तमन्ना बस तेरी मैं यार करता हूँ 
साथ हो तू ये दुआ हर बार करता हूँ 
तू मिले तो ज़िन्दगी ये लगती है जन्नत 
वरना चाँद तारों में दीदार करता हूँ 
ज़िन्दगी में यूँ तो काफी ख्वाहिशे मुझको 
ज़िन्दगी से ज्यादा तुझको प्यार करता हूँ ||

सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

जब चाँद को अपनी चांदनी का गुरूर होता है 
जब फिजाओं में ताजगी का एक अलग नूर होता है 
तब लाख बचाए दिल खुद को मगर 
ऐसे मौसम में ये प्यार ज़रूर होता है ।

पहला प्रभाव

वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...