शगुफ्ता थे , अपनी हंसी दरकिनार कर बैठे
किसी की याद में नींदें निसार कर बैठे
और वो आँखें , जिन्होंने कल हमारी नींद लूटी थी
हुए मजबूर इतने कि , उन्ही से प्यार कर बैठे ।।
वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...