था अभी तक मैं डरा सा और सहमा सा ज़रा
था अभी तक व्यर्थ की चिंता में मैं डूबा रहा
थी अभी तक मेरे हंसने-रोने पर पाबंदियां
थे मेरे भी पर मगर चलता थे ले पगडंडियां
मुश्किलों को ताख पर रख खुल के उड़ना चाहता हूँ
आज फिर से ज़िन्दगी मैं तुझको जीना चाहता हूँ ॥
चाहता हूँ हंसना थोड़ा और रोना भी ज़रा
चाहता हूँ उड़ना थोड़ा और गिरना भी ज़रा
चाहता हूँ मैं समय सा ही सदा चलता ही जाऊं
चाहता हूँ मैं ना रुकना और सुस्ताना ज़रा
इस तरह मैं बिन रुके ,जीवन पे चलना चाहता हूँ
आज फिर से ज़िन्दगी मैं तुझको जीना चाहता हूँ ॥
चाहता हूँ तारा बनना फिर किसी की आँख का
चाहता हूँ प्यार पाना मैं हर एक हालात का
चाहता हूँ फिर से मेरे सर पे कोई हाथ फेरे
चाहता हूँ कोई दे आशीष मुझको हर दफा
फिर मैं माँ की गोंद में सर रखकर सोना चाहता हूँ
आज फिर से ज़िन्दगी मैं तुझको जीना चाहता हूँ ॥
चाहता हूँ मैं किसी आँखों से आँखें चार करना
चाहता हूँ मैं उन्ही में डूबना और फिर उतरना
चाहता हूँ कोई मेरे साथ जीवनभर चले
चाहता हूँ मैं ज़माने में किसी से प्यार करना
आज खुद को प्यार का मैं तोहफा देना चाहता हूँ
आज फिर से ज़िन्दगी मैं तुझको जीना चाहता हूँ ॥
इस ज़रा सी ज़िन्दगी के कुछ अलग हालात हैं
व्यस्त है हर एक व्यक्ति और मरे ज़ज्बात हैं
तीज त्योहारों पे अक्सर मिलना होता था जहाँ
अब मानते हैं अकेले ऐसे क्यों हालात हैं
दोस्तों का साथ छूटा , रिश्ते-नाते सब जुदा
जा रहे हैं हम कहाँ दौलत की अंधी दौड़ में
दोस्तों-रिश्तों का फिर मैं प्यार पाना चाहता हूँ
आज फिर से ज़िन्दगी मैं तुझको जीना चाहता हूँ ॥
॥आखिर॥
था अभी तक व्यर्थ की चिंता में मैं डूबा रहा
थी अभी तक मेरे हंसने-रोने पर पाबंदियां
थे मेरे भी पर मगर चलता थे ले पगडंडियां
मुश्किलों को ताख पर रख खुल के उड़ना चाहता हूँ
आज फिर से ज़िन्दगी मैं तुझको जीना चाहता हूँ ॥
चाहता हूँ हंसना थोड़ा और रोना भी ज़रा
चाहता हूँ उड़ना थोड़ा और गिरना भी ज़रा
चाहता हूँ मैं समय सा ही सदा चलता ही जाऊं
चाहता हूँ मैं ना रुकना और सुस्ताना ज़रा
इस तरह मैं बिन रुके ,जीवन पे चलना चाहता हूँ
आज फिर से ज़िन्दगी मैं तुझको जीना चाहता हूँ ॥
चाहता हूँ तारा बनना फिर किसी की आँख का
चाहता हूँ प्यार पाना मैं हर एक हालात का
चाहता हूँ फिर से मेरे सर पे कोई हाथ फेरे
चाहता हूँ कोई दे आशीष मुझको हर दफा
फिर मैं माँ की गोंद में सर रखकर सोना चाहता हूँ
आज फिर से ज़िन्दगी मैं तुझको जीना चाहता हूँ ॥
चाहता हूँ मैं किसी आँखों से आँखें चार करना
चाहता हूँ मैं उन्ही में डूबना और फिर उतरना
चाहता हूँ कोई मेरे साथ जीवनभर चले
चाहता हूँ मैं ज़माने में किसी से प्यार करना
आज खुद को प्यार का मैं तोहफा देना चाहता हूँ
आज फिर से ज़िन्दगी मैं तुझको जीना चाहता हूँ ॥
इस ज़रा सी ज़िन्दगी के कुछ अलग हालात हैं
व्यस्त है हर एक व्यक्ति और मरे ज़ज्बात हैं
तीज त्योहारों पे अक्सर मिलना होता था जहाँ
अब मानते हैं अकेले ऐसे क्यों हालात हैं
दोस्तों का साथ छूटा , रिश्ते-नाते सब जुदा
जा रहे हैं हम कहाँ दौलत की अंधी दौड़ में
दोस्तों-रिश्तों का फिर मैं प्यार पाना चाहता हूँ
आज फिर से ज़िन्दगी मैं तुझको जीना चाहता हूँ ॥
॥आखिर॥