गुरुवार, 8 मई 2014

खामोश क्यों खड़ा है दिल , कुछ खुराफात कर
यूँ बैठने से होगा क्या , तु दिन को रात कर
आया है नज़र मुद्दतों मे ,  ईद का वो चांद
घुल जाए बाहों मे तेरी , कुछ तो फिराक़ कर ॥

बस देखता रहेगा क्या , कुछ बोल तो जरा
आँखों से बात कि बहुत  , लब खोल तो जरा
वो भी बनेगा हमसफ़र , हर रात का तेरे
तू राज़ अपने दिल का , कभी खोल तो जरा ॥

॥आखिर॥

पहला प्रभाव

वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...