शनिवार, 9 अक्टूबर 2021

पहला प्रभाव

वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं
बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥

कल तक जो दिखते ना थे अंदर से
वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ॥

काफ़ी शांत था, शोर बहुत कम था अंदर
ना जाने क्यों मुझे देख आज सारे चिल्ला रहे हैं ॥

मेरी बात को समझते नहीं हैं आखिर तक
जब रोऊँ तो सब गोद में खिला रहे हैं ॥

मज़ा आ रहा है इनकी टेढ़ी-मेढ़ी शक्लें देखकर
मुझे हँसाने के लिए ये जो बना रहे हैं ॥

सारे नाते-रिश्तेदार लगे हैं मेरी सेवा में
मेरा साथ पा कर सब क्यों इतना इतरा रहे है ॥

मैं चैन से सो सकूं खुश रहकर ' आखिर '
इस खातिर सब अपनी नींदें गवां रहे हैं ॥

॥ आखिर ॥

पहला प्रभाव

वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...