शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

मेरी हसरत

अभी कैसे बताऊँ क्या मेरे इस दिल की हसरत है
ज़रा जीने की हसरत है ज़रा मरने की हसरत है ॥

ज़माने में मेरा अब तक कोई वजूद भी है क्या ?
अदब से नाम ले मेरा ज़माना इतनी हसरत है ॥

कभी कोई गुलाब मेरे भी जीवन को महकाए
किसी के प्यार में खुद को भुला जाने की हसरत है ॥

जहाँ में हो फकत  मेरी वफादारी के ही चर्चे
किसी के साथ पूरी ज़िन्दगी जीने की हसरत है ॥

वो जिसके स्पर्श से हमको मिले जन्नत सी हर खुशियां
हा एक बच्चे की उंगलियां पकड़ चलने की हसरत है ॥

वो जिन लोगो की बिन मेरी शराफत शून्य लगती है
मेरे माता पिता हो खुश मेरी इतनी सी हसरत है ॥

मेरा ओहदा नहीं कर्तव्य हो पहचान इस जग में
मुझे हो चाहने वाले जहाँ में इतनी हसरत है ॥

की हसना और हँसाना बस मेरी फितरत रहे "आखिर"
मेरी मैयात में हँसता हर कोई आये ये हसरत है ॥


॥आखिर॥ 

बुधवार, 26 नवंबर 2014

गुनहगारों की महफ़िल में तेरा क्या काम है "आखिर"
चलो उस ओर जाएँ हम जहाँ ईमान बसता हो
बहुत ढूंढा बहुत खोजा मगर ना मिल सका हमको
जहाँ भर में शहर वो एक जहाँ इंसान बसता हो ॥

॥आखिर॥ 

सोमवार, 24 नवंबर 2014

जब से देखा तुझे

जब से देखा तुझे मैं भूल गया हूँ खुद को
देखा है सिर्फ तेरा ख्वाब है चाहा तुझको
एक तेरा साथ मिले मुझको हर कदम इसकर
लाखों सजदे किये दुआ में माँगा है तुझको ॥

तू जो होता नहीं तो जैसे ख़ुशी रूठ जाती है
होठों पे आते-आते हमसे हंसी रूठ जाती है
यूँ न छुप कर के हमे और सता ए हमदम
तेरे मुखड़ा जो ना देखूं तो दुआ रूठ जाती है ॥

चाँद से जब कभी होती है गुफ्तगू अपनी
तेरी बातों में जाने रात कैसे बीत जाती है
तेरी हरकत पे अगर चाँद कभी हँसता है
चांदनी चाँद से झुंझला के रूठ जाती है ॥

जब से देखा है मैंने खुद को तेरी आँखों में
रात भर अब मुझे ये नींद कहाँ आती है
हर घडी बस यही मैं सोचता हूँ क्यों आखिर?
तू नहीं आती है पर याद तेरी आती है ॥

खैर अंजाम जो भी हो इस सफर का अब
संग तेरे चलने में थकान कहाँ आती है
एक तेरा ही मिले साथ हर जनम "आखिर"
तेरी बाँहों के सिवा नींद कहाँ आती है ॥

॥आखिर॥ 

शनिवार, 22 नवंबर 2014

अक्सर दिन तो कट जाते हैं पर रातें नहीं कटती
काट जाते हैं हर मौसम ये बरसातें नहीं कटती
मोहब्बत में बिताये पल अभी भी याद आते हैं
कि अब भी तेरी आँखों से मेरी आखें नहीं हटती ॥

॥आखिर॥

सोमवार, 17 नवंबर 2014

ज़ुर्रत मैं तुझे भूलने की कर नहीं सकता
मैं प्यार किसी और से अब कर नहीं सकता
उस मोड़ पे लाया है मुझे प्यार तेरा जब
मर कर भी मैं अब तुझसे जुदा हो नहीं सकता ॥

॥आखिर॥

शनिवार, 15 नवंबर 2014

राहों पर था घुप्प अँधेरा और सड़क का पता नहीं
कहीं कभी जल जाती शम्मा कब बुझ जाये पता नहीं
जीवन दर-दर ठोकर खाकर ऐसे जिया करती थी
किस आंधी में लौ बुझ जाए इसका कोई पता नहीं
फिर मैं एक रस्ते पर चल जीवन से मिलकर आया हूँ
मैं भारत दर्शन करके मैं गाँव देख कर आया हूँ ॥

॥आखिर॥ 

शुक्रवार, 14 नवंबर 2014

To #life ... :)
मंज़िलों को पाना इतना आसान नहीं होता
कि बिखर जाते हैं इंसान इसे अपना बनाने में
पर ऐसी शख्सियत दी है खुदा ने हमे "आखिर"
हम बाज़ नहीं आते खुद तो आज़माने से ॥

॥आखिर॥

बुधवार, 12 नवंबर 2014

अभी तक ढूंढता था मैं उसे जो साथ रह जाये
मैं उसमे डूब जाऊं और वो मेरे पास रह जाए
बड़ी शिद्दत से चाहा है किसी को आज मैंने भी
मैं उसका हो के रह जाऊं वो मेरा हो के रह जाए ॥

॥आखिर॥ 

मंगलवार, 11 नवंबर 2014

कुछ हो गयी है बात कुछ बात अभी बाकी है
इस प्यार की नयी कई सौगात अभी बाकी है
अभी तो है जवान हुआ ये इश्क़ मेरा अब
ना जाओ छोड़कर मुझे ये रात अभी बाकी है ॥

॥आखिर॥

शनिवार, 8 नवंबर 2014

तेरी हर आरज़ू में मैं अगर होता तो अच्छा था
हंसी इन वादियों में साथ तू होता तो अच्छा था
तुझे पाने की हसरत ज़िन्दगी जीने नहीं देती
खुदाया तू मुझे अब ख़ाक कर देता तो अच्छा था ॥

॥आखिर॥ 

गुरुवार, 6 नवंबर 2014

आगाज़ हुआ है तो अंजाम भी अच्छा ही होगा
मेरी हर सच्ची कोशीश का परिणाम भी अच्छा ही होगा
धीरे-धीरे ही सही मगर मैं पहुंचूंगा अपनी मंज़िल तक
जीवन के सफर में अपना मुकाम भी अच्छा ही होगा ॥

॥आखिर॥ 

पहला प्रभाव

वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...