शायद कभी हंसती हैं
या हर पल रुलातीं हैं
जीवन को बेचैन करतीं है
और कभी जीना सिखातीं हैं
कभी देखते थे चेहरे जिनके हम हर रोज़
आज उनसे बात करने को भी तरसाती है
शायद इसी का नाम जीवन है
जो हमे कभी हंसाती है ..और कभी रुलाती है ...:-\
कुछ वक़्त का तकाजा था , कुछ मौसम-ए-दस्तूर
तू थी दिल के पास मगर , फिर भी मुझसे दूर
पर एहसास एक हसीं मेरा तुझमे गहरा था
भूल नहीं सकता उस पल को मैं जब
तेरी आँखों में सजा शर्म का सुर्ख पहरा था
तू चुप थी मगर आँखें तेरी हर बात कह गयी
जो दिल में थी छुपी तेरे हर राज़ कह गयी
कि कितनी मोहब्बत है तुझे मुझसे जहान में
न चाहते हुए भी तू मुझे ये बात कह गयी ||
बातें हुई इशारों में कोई सुन न भी सका
तेरी आँखों ने जब कहा तो मैं इकरार कर सका
हाँ है मोहब्बत मुझको तेरे नाम से यहाँ
जो तुझसे है जुदा उस हर इक काम से यहाँ
है चाह ये मेरी की बस एक तू मिले मुझे
तेरे साथ सा मुक्कदस सहारा यूँ मिले मुझे
कि कट जाएँ हर इक पल मेरा तेरी पनाह में
और मौत जब मिले तो तेरे साथ ही यहाँ ||
आज फिर तुमसे मिलने को दिल चाहता है
निगाहों में खिलने को दिल चाहता है
गुस्ताखियाँ तो बहुत की थी मैंने
मनमानी करने को दिल चाहता है ||
मोहब्बत की कुछ ये कहानी अजब है
अदाओं में पायी नयी ज़िन्दगी है
इशारों-इशारों में बातें क्या कर दी
निगाहें मिलाने को दिल चाहता है ||
तसव्वुर है तेरा तेरी बात है यूँ
की भूला जहाँ मैं नहीं याद खुद को
तेरी बातों ने ऐसा जादो किया है
की फिर झिलमिलाने को दिल चाहता है ||
तनहाइयाँ थी बहुत ज़िन्दगी में
थे गम मुझपे भरी, ख़ुशी मुझसे रूठी
तेरी चाहतों का असर कुछ हुआ यूँ
की फिर मुश्कुराने को दिल चाहता है ||
वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...