जब से मिले हो तुम , सब बदल गया है जैसे
कि अब जग झूठ और तेरा प्यार सच्चा लगता है
और यूँ तो बहुत बड़बोले थे हम मगर
अब चुप-चाप तेरे करीब रहना अच्छा लगता है ॥
और लाल पीले हरे नीले , कई रंग देखे थे हमने
पर तेरे रंग के आगे ये सब कच्चा लगता है
कि अब तक खेलते थे हम , इन रंगों में डूब कर होली
पर अब तेरे प्यार के रंग में रंगना अच्छा लगता है ॥
"आखिर"
कि अब जग झूठ और तेरा प्यार सच्चा लगता है
और यूँ तो बहुत बड़बोले थे हम मगर
अब चुप-चाप तेरे करीब रहना अच्छा लगता है ॥
और लाल पीले हरे नीले , कई रंग देखे थे हमने
पर तेरे रंग के आगे ये सब कच्चा लगता है
कि अब तक खेलते थे हम , इन रंगों में डूब कर होली
पर अब तेरे प्यार के रंग में रंगना अच्छा लगता है ॥
"आखिर"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें