बस तेरी ही आरज़ू थी मेरे इस दिल में बसी
बस तेरी थी जुस्तजू मेरी निगाहों में कहीं
बस तेरा ही था तस्सव्वुर मेरे हर इक ख्वाब में
बस तेरी ही खुशबुएँ थी मेरी साँसों में बसी ||
बस तेरी ही बातें थी और बस तेरा ही नूर था
प्यार तुझसे करने को मैं हर घडी मजबूर था
प्यार की थी रुत अनोखी जिसमे मैं मगरूर था
नाज़ था तेरी वफ़ा पर जो मेरा गुरूर था
साथ रहते हम हमेशा एक ही तो ख्वाब था
साथ तेरा पाके मैं हर पल नशे में चूर था ||
ख्वाब था शायद वो मेरा आज ये जाना हूँ मैं
जनता न था तुझे पर आज पहचाना हूँ मैं
प्यार के क्या मायने हैं तुने न जाना कभी
मेरे दिल की धडकनों को तुने पहचाना नहीं
जीते थे ये बस तुम्ही पर और मरते तुमपे ही
थी वफाई बस दिलों में चाहते थे तुमको ही ||
क्या वफ़ा और क्या वफाई तू कभी कर पाएगी
बेवफा है बेवफाई करके ही मर जाएगी
प्यार में है क्या मज़ा और क्या छुपी सच्चाई है
तुने न जाना कभी अब जान न तू पायेगी
प्यार कितना करता था तेरे अक्स से तेरे नूर से
मेरे जैसी आशिकी तू फिर कभी न पायेगी ||
ऐसा कुछ कर दे खुदा की तेरा यूँ नसीब हो
हुस्न हो जब ये मुक्कल प्यार न करीब हो
जब कभी तुझपे चढ़ा इस प्यार का सुरूर हो
रातें हो तेरी जवान पर हुस्न ये बेनूर हो
की जो तुने बेवफाई क्या सजा तुझको मिले
बस यही चाहूँगा ऐसा यार न फिर से मिले ||