ईश्वर करम करना मौला रहम करना
जीवन में मुझको और नहीं अपमान पड़े सहना
ईश्वर करम करना मौला रहम करना ॥
ना आदमी ताड़े हमे हर एक मोड़ पर
ना आदमी छेड़े हमे अब शाम और शहल
हो तेरी झोली में पड़ी इंसानियत अगर
तू बाँट दे इनमे बराबर वो ज़रा-ज़रा
कि ना करें हुड़दंग ये इनपर नज़र रखना
ईश्वर करम करना मौला रहम करना ॥
मूकदर्शक ना मिले मुझको शहर में अब
चुप रहें ना कुछ कहें जो देख-सुन के सब
कुछ इनायत कर ज़रा इनको तू हिम्मत दे
कि साथ दें लड़ने में ज़ुल्मी से ज़रा ये सब
गांधी के बन्दर ना बने बस ये करम करना
ईश्वर करम करना मौला रहम करना ॥
मैं सर उठा के जी सकूँ मुझको ये बल मिले
मैं जब ख़ुशी से हंस सकूँ मुझको वो पल मिले
चाहे बड़ी घनघोर सी काली सी रात हो
जिस पल तुझे सोचूं मुझे उस पल में तू मिले
तू कृष्ण बनकर द्रौपदी की फिर शरम रखना
ईश्वर करम करना मौला रहम करना ॥
॥आखिर॥