शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2014

शगुफ्ता हर चेहरे का अलग एक राज़ होता है
कहीं दुःख होते है तो फिर कहीं उत्साह होता है
जो हँसता है , वो खुश होगा , ये तुम मत मानना लोगों
दुःखों को भी छुपाने का ये एक अंदाज़ होता है ॥

॥आखिर॥ 

सोमवार, 27 अक्टूबर 2014

कहानी में अचानक कल नया एक मोड़ आया है
मेरी हसरत जो चेहरा था वो मेरी ओर आया है
बड़ी मुद्दत से चाहा था जिसे यूँ पास है मेरे
फलक से खुद उतरकर ज्यों कोई महताब आया है ॥

॥आखिर॥ 

शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2014

दिल में है जूनून और नभ को छूने के इरादे हैं
हम ऊपर से ज़रा टेढ़े हैं दिल के सीधे-सादे हैं
ऐ माटी कर सबर "आखिर" में तुझमे आ मिलेंगे हम
अभी तो पर लगे हैं हम हवा के शाहज़ादे हैं ॥

॥आखिर॥ 

बुधवार, 22 अक्टूबर 2014

ना जाने क्यों खुदा मशरूफ़ियत इतनी अदा कर दी
कि जीवन की हर एक छोटी ख़ुशी इसने हवा कर दी
जो बीता करते थे पल दोस्तों-रिश्तों के दरमियान
समय की दौड़ ने ये ज़िन्दगी उनसे जुदा कर दी ॥

॥आखिर॥ 

मंगलवार, 21 अक्टूबर 2014

जिन्हे मिलकर के हम अपने ग़मों को भूल जाते हैं
जिनके साथ हम खुल के हैं हँसते मुस्कुराते हैं
जिनको देखकर फिकरें अचानक भाग जातीं हैं
कि जिनके साथ बीते कल की यादें जगमगातीं हैं
जिन्हे हम राज़ की अपनी हर एक बातें बताते हैं
जो बिन बोले ही अपने हाल-ए-दिल को जान जाते हैं
की जिनसे रोशनी आती है जीवन के अंधेरों में
और जिनके साथ खुशियाँ खुद बखुद दुगनी हो जाती हैं
उन्ही लोगों को अपनी ज़िन्दगी का हाल कहते हैं
उन्ही लोगों से यहाँ दोस्ती पहचानी जाती है ॥

॥आखिर॥

रविवार, 19 अक्टूबर 2014

प्यार मेरा भी सच्चा लगता है

तेरे संग उठती हर सुबह मेरी तुम ना हो तो हो शाम
तेरे बिन मुझको यूँ लगता है जैसे हो सिय बिन राम
यूँ तेरा हर सपने में आना अच्छा लगता है
तुम साथ जो हो तो प्यार मेरा भी सच्चा लगता है ॥

तुम यूँ आये जीवन मेरे जैसे वन में हरियाली हो
तुम तीज मेरी त्यौहार मेरे जीवन की तुम दीवाली हो
सूने जीवन में खुशियां आना अच्छा लगता है
तुम साथ जो हो तो प्यार मेरा भी सच्चा लगता है  ॥

ना देखा है मैंने खुद को कई बरसों से आईने में
तेरी आँखों में ही दिखा हूँ मैं बसता हूँ तेरे सीने में
तेरी परछाईं में खुद को पाना अच्छा लगता हैं
तुम साथ जो हो तो प्यार मेरा भी सच्चा लगता है ॥

मैं करता हूँ बस प्यार तुम्हे तुम जग में सबसे प्यारी हो
जैसे हूँ मैं तेरा "श्याम" प्रिये , तुम मेरी "राधा" प्यारी हो
तुमसे हर पल मिलना हमे कितना अच्छा लगता है
तुम साथ जो हो तो प्यार मेरा भी सच्चा लगता है ॥

तुम बिन ना जाने क्या होगा मेरा इस दुनिया में "आखिर"
तुम सा तो कोई मिलेगा नहीं हो जाऊंगा फिर मैं काफिर
तेरे प्यार में वो ऊपर वाला भी सच्चा लगता है
तुम साथ जो हो तो प्यार मेरा भी सच्चा लगता है ॥

॥आखिर॥ 

शनिवार, 18 अक्टूबर 2014

तेरी गुस्ताख़ सी आँखों का ही तो मैं दीवाना हूँ
तेरी बेबाक सी बातों का ही तो मैं दीवाना हूँ
तेरा शर्माना मुझको देखकर हंसकर के छुप जाना
कि इन दिलकश अदाओं का ही तो मैं दीवाना हूँ ॥ 

सोमवार, 13 अक्टूबर 2014

जीना है जीभरकर इसको अपना यही फ़साना है 
कुछ खुशियां थोड़े गम पीकर "आखिर" तो मर जाना है ॥ 

॥आखिर॥

रविवार, 12 अक्टूबर 2014

आया हूँ अगर दिल में तो इकरार कीजिये
पलकें झुका के प्यार का इज़हार कीजिये
यूँही बीत ना जाये ये अपनी रैना मिलान की
आएं करीब आके ज़रा प्यार कीजिये ॥

॥आखिर॥ 

शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

याद आती हैं

जो तुझ संग की मुलाकातें तेरे संग बीती जो रातें
हाँ मुझको याद आती हैं तेरी बचकानी सी बातें ॥

वो तेरा रूठ कर मुझसे झगड़ना और ना कुछ कहना
नहीं भूला हूँ मैं तुझको मानते बीती जो रातें ॥

तेरे दो नयन जो मुझसे तेरा हर राज़ कहते थे
तेरे दिल का आइना थीं तेरी हंसती हुई आखें ॥

मोहब्बत थी हमे खुद से जियादा तुमसे ऐ हमदम
गवाही देते हैं नभ के सितारे और ये बरसातें ॥

तू मेरा जाम था सकी था मैख़ाना तू ही मेरा
के मय का एक पियाला थी तेरी इठलाती सी आखें ॥

नहीं मालूम क्यों बिछड़े हैं हम तुम मिल के यूँ आखिर
बहुत ही गूढ़ होती हैं लकीरों की ये सब बातें ॥

करूँ मैं क्या ना तुझको भूल पता मेरा दिल "आखिर"
कि मुझको याद आती है वो हंसती प्यारी सी आँखें ॥

॥आखिर॥ 

सोमवार, 6 अक्टूबर 2014

बात निकलेगी तो इज़्ज़त की फिकर मत करना
इश्क हो गर तुझे फुरकत की फिकर मत करना
तेरी हसरत अगर मरना इस वतन के लिए
साथ रखना कफ़न मज़हब की फिकर मत करना ॥

॥आखिर॥

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2014

ज़िन्दगी की देश में न जाने क्या औकात है
ये तो है बस एक पियादा , शासन की एक बिसात है
गम नहीं कोई मरे बिछड़े किसी से हम यहाँ
इन सियासी भेड़ियों की बस यही तो ज़ात है ॥
एक ही गलती इन्हे करना यहाँ है बार-बार
एक ही तो है बहाना रट के बैठे ये तैयार
जान की कीमत लगते वेश और परिवेश देख
फिर कहीं संवेदना के आंसू गिराते हैं दो-चार
जाने कब समझेंगे ये इतनी से जो ये बात है
इन सियासी भेड़ियों की बस यही तो ज़ात है ॥
॥आखिर॥

पहला प्रभाव

वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...