गुरुवार, 22 जनवरी 2015

ज़रा सी बात को दिल से लगा के बैठे हैं

ज़रा सी बात को दिल से लगा के बैठे हैं
एक मुद्दत से वो नज़रें चुरा कर बैठे हैं ॥

ए चाँद आज उतर , जा के ये बता उनको
हम उनकी याद में नींदे गवां के बैठे हैं ॥

ना जानते हैं वो शायद मेरा हाल-ए-दिल
हम उनकी राह में पलकें बिछा के बैठे हैं ॥

दे ना पाये कोई इलज़ाम ये ज़माना तुमको
इसलिए खुद को ही झूठा बना के बैठे हैं ॥

एक तेरे जाने के गम को छुपाने की खातिर
कई हँसते हुए चेहरे लगा के बैठे हैं ॥

प्यार क्या कोई करेगा तुम्हे हमसे ज्यादा
हम तेरे नाम को अपना बना के बैठे हैं ॥

यूँ तो बिखरे से हैं अरमान मगर तू है दिल में
इसलिए आज भी ये दिल सजा के बैठे हैं ॥

॥आखिर॥ 

पहला प्रभाव

वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...