रविवार, 25 सितंबर 2011

हाल-ऐ-दिल

मुश्किल बड़ी की दिल को है अरमान बस तेरा
दिखता नहीं तेरे सिवा कोई और दूसरा
एहसास ये कुछ यूँ मुझे पहली दफा हुआ
हर पल तुम्हे चाह या तुम्हे देखता रहा ||

क्या क्या छुपाये रखा है दिल मैं न जानता
क्यूँ धुंधली सी दिखती है ये मंजिल न जानता
है अक्स तेरे प्यार का मेरा गुरूर जो
कब तक चलूँ इस राह पर दिखता न रास्ता ||

उम्मीद तेरे दिल में इक छोटा सा घर मिले
मैं जी सकूँ जिस वक़्त वो अदना सा पल मिले
कैसे बताऊँ जीने की जो तड़प है तेरे संग
कुछ यूँ समझ क मौत मुझे तेरे दर मिले ||

मर के भी मैं जियूँगा तेरी यादों में कहीं
भूले से भी न भूल पाएगी मुझे कभी
नम होंगी तेरी आँखें भी जब उठेगी बात यूँ
क्या कुछ मैं कर गया थे तेरे प्यार में यूँही ||

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