सोमवार, 17 सितंबर 2012

ज़िन्दगी की हर डगर पर अपना काम चला लेते है 
जब यार हो साथ तो हम भी माहौल बना लेते है
अरे हम तो उनमे से है कभी हार नहीं मानते और  
मौसम हो कैसा भी हम आशियाने बना लेते है ||

शुक्रवार, 14 सितंबर 2012

ये उन रातों का कसूर है ज़ालिम 
जो हमने तेरे साथ काटी थी
कि अब तन्हाई के नाम से भी डरते थे  
तेरे साथ हर महफ़िल में महसूस किया था
मोहब्बत के सुरूर को हमने 
पर आज तनहा हुए तो जाना 
कि तुझे कितना प्यार करते थे ||

गुरुवार, 6 सितंबर 2012

आंसुओं को छुप-छुप के निकलते 
कई बार हमने देखा 
जो रहते थे स्वछन्द हमेशा उनको भी 
बेक़रार हमने देखा 
और अब तक तो सिर्फ सुनते आये थे 
हम किस्सा मोहब्बत का 
पर तुझसे नज़रें मिली पहली बार तो 
क्या होता है प्यार हमने देखा ||

पहला प्रभाव

वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...