दोस्तों की महफ़िलों में मिल के हमने भी जाम छलकाए
जहाँ तक नज़र गयी , सभी झूमते नज़र आये
पर ये नशा भी फीका लगा हमे उस नशे के आगे जब
जान दूँ में हंस के मेरी माँ और तेरा परचम पूरे विश्व में लहराए ।।
वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...
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