वीराना है दिल मेरा उनकी याद में लेकिन
वो है की खुद को छुपाये बैठे है
और अक्ल तो तब आई जब चिट्ठी मिली हमे
की वो भी हर पल मेरे ख्याल में बैठे है ||
वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें