ऐ देश तेरी नादानी पे मुझे हंसी आती है
क्या ऐसे भी किसी देश द्रोही को फंसी दी जाती है
की जितना उसे पालने में खर्च किये तूने
उसमे न जाने कितने गरीबों की भूख मिट जाती है
ऐ देश तेरी नादानी पे मुझे हंसी आती है ।।
वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...
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