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आंसुओं से कह दो की छुप जाएँ वो पलकों के नीचे
कि हर इक राज़ दिल का ये बयां कर जाएँगी
कि चाहत कि कहानी जो बयां ये लब न कर पाए
कि जो गर खुल गयीं आँखें तो बातें सब बयां कर जाएँगी ||
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शनिवार, 21 अप्रैल 2012
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पहला प्रभाव
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