ये मौसम ये रुत और ये तनहा सा आलम
तेरी याद बस मुझको आने लगी है
जो बातें कभी करती थी हमको घायल
वो बातें ही अब तो सताने लगीं है
तेरी याद बस मुझको आने लगी है ||
निगाहों में थे जो भी चाहत के नगमे
वो नासूर बन कर डराने लगीं हैं
थी आँखों की नदियाँ जो बरसों से सूखी
वो बिन मौसम बरसात लाने लगीं हैं
तेरी याद बस मुझको आने लगी है ||
जो रहते थे बस तेरी आँखों में डूबे
तेरी एक झलक को बेगाने हुए हैं
शराबों से जो हर पल करते थे तौबा
शराबों में अब वो नहाने लगे हैं
नजारों को अब तक तो ढूँढा था तुझमे
अब तुझको नजारों में पाने लगे है
ये मौसम ये रुत और ये तनहा सा आलम
तेरी याद बस मुझको आने लगी है ||
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