शनिवार, 23 अगस्त 2014

तुझे ही ढूंढता हूँ और तेरी ही बात करता हूँ
न जाने क्यों यही हरकत मैं अब दिन-रात करता हूँ
नहीं आता सुकून दिन में नहीं अब चैन रातों को
की ख्वाबों में तुझे मिलने की ख्वाहिश यार करता हूँ ॥ 

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