ऐ-खुदा! मेरे जीवन में फकत ये आदत लिखना
जिऊं मैं वतन के लिए और मौत में शहादत लिखना ॥
ना मिले मुझे दो गज ज़मीन तो कोई गम नहीं
बस कफ़न में एक तिरंगा की चाहत लिखना ॥
मैं हिन्दू बनु या मुस्लमान ,या सिख या ईसाई कोई फर्क नहीं
बस फितरत में मेरी , मेरे वतन की इबादत लिखना ॥
ना रहे मेरा मुल्क किसी की गुलामी में
मेरे हमवतन की किस्मत में सिर्फ बादशाहत लिखना ॥
भूखा-नंगा ना रहे कोई वतन में मेरे
सब के नसीब में इतनी तो राहत लिखना ॥
मंदिरों और मस्जिदों ने सिर्फ बांटा है हमे अबतक
अबके बार उनमे भी जोड़ने की आदत लिखना ॥
जी सके सब लड़कियां सम्मान की एक ज़िन्दगी
मेरी साँस के हर कतरे पर उनकी हिफाज़त लिखना ॥
इतना करम "आखिर" में मुझ पर और करना ऐ-खुदा!
मेरे हर जनम में देश का एक नाम बस "भारत" लिखना ॥
॥आखिर॥
जिऊं मैं वतन के लिए और मौत में शहादत लिखना ॥
ना मिले मुझे दो गज ज़मीन तो कोई गम नहीं
बस कफ़न में एक तिरंगा की चाहत लिखना ॥
मैं हिन्दू बनु या मुस्लमान ,या सिख या ईसाई कोई फर्क नहीं
बस फितरत में मेरी , मेरे वतन की इबादत लिखना ॥
ना रहे मेरा मुल्क किसी की गुलामी में
मेरे हमवतन की किस्मत में सिर्फ बादशाहत लिखना ॥
भूखा-नंगा ना रहे कोई वतन में मेरे
सब के नसीब में इतनी तो राहत लिखना ॥
मंदिरों और मस्जिदों ने सिर्फ बांटा है हमे अबतक
अबके बार उनमे भी जोड़ने की आदत लिखना ॥
जी सके सब लड़कियां सम्मान की एक ज़िन्दगी
मेरी साँस के हर कतरे पर उनकी हिफाज़त लिखना ॥
इतना करम "आखिर" में मुझ पर और करना ऐ-खुदा!
मेरे हर जनम में देश का एक नाम बस "भारत" लिखना ॥
॥आखिर॥
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