शनिवार, 9 अगस्त 2014

कहीं खुद से शिकायत है कहीं तेरी इनायत है
तेरी दी ज़िन्दगी हर एक कदम पर जीने लायक है ॥

कभी ये खुशनुमा होती है तो हमको हंसती है
कभी ये रूठ जाती है तो संग हमको रुलाती है
हैं गर खुशियां भरी इसमें तो गम भी सहने लायक हैं
खुदा ये ज़िन्दगी हर एक कदम पर जीने लायक है ॥

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