तेरी पलकों के किनारे से
एक हाँ का इंतज़ार मैं आज भी करता हूँ
तेरी बाँहों के दरमियान जो बीते कभी
उस शाम का इंतज़ार आज भी करता हूँ
तू मेरे इश्क़ की इब्तिदा है
इबारत भी तू ही है "आखिर"
इबादत तेरी ही की है कि
तुझसे प्यार मैं आज भी करता हूँ ॥
॥आखिर॥
एक हाँ का इंतज़ार मैं आज भी करता हूँ
तेरी बाँहों के दरमियान जो बीते कभी
उस शाम का इंतज़ार आज भी करता हूँ
तू मेरे इश्क़ की इब्तिदा है
इबारत भी तू ही है "आखिर"
इबादत तेरी ही की है कि
तुझसे प्यार मैं आज भी करता हूँ ॥
॥आखिर॥
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