गुरुवार, 24 जुलाई 2014

जितने अपने थे सब बेगाने हो गए
तेरे जाते ही महफ़िल वीराने हो गए ॥

जो कल तक थी बस तेरे मेरे दरम्यान
वो सारी बातें अब अफसाने हो गए ॥

अब तक तुझमे ही देखि थी अपनी सूरत
आदत यूँ पड़ी कि आईने बेमाने हो गए ॥

तेरी बाँहों की गर्मी में जो पिघलता था मेरी रात का चाँद
आज वो तेरी यादों के सिरहाने हो गए ॥

और तू गया दूर यूँ कर कि सुधुरुंगा मैं "आखिर"
पर अब तो हम तेरे और भी दीवाने हो गए ॥


||आखिर||


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