तेरे मेरे चाहने से क्या होगा 'आखिर'
मिलता वही है जो नसीब में रहता है
और वो भी देखेगा कभी मुफलिसी का आलम
जो आज हमे गरीब कहता है ॥
मिलता वही है जो नसीब में रहता है
और वो भी देखेगा कभी मुफलिसी का आलम
जो आज हमे गरीब कहता है ॥
वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...
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