ऐ खुदा वक़्त कुछ वो भी मेरे दर आये
मैं भी खुश हो सकूँ ऐसा कोई मंज़र आये ॥
जो मेरा यार है मुफ़लिस नसीबदारों में
एक ख़ुशी का ज़र्रा तो उसे नसीब आये ॥
तू जियादत्ति और न कर उसकी मेहनत पर ऐ-खुदा !
एक कामयाबी उसे भी तो मुक़र्रर आये ॥
और जाने ये ज़माना भी मेहनत के नतीज़ों को
कि उसके हौसलों में भी तो "आखिर" उड़ान आये ॥
॥आखिर॥
मैं भी खुश हो सकूँ ऐसा कोई मंज़र आये ॥
जो मेरा यार है मुफ़लिस नसीबदारों में
एक ख़ुशी का ज़र्रा तो उसे नसीब आये ॥
तू जियादत्ति और न कर उसकी मेहनत पर ऐ-खुदा !
एक कामयाबी उसे भी तो मुक़र्रर आये ॥
और जाने ये ज़माना भी मेहनत के नतीज़ों को
कि उसके हौसलों में भी तो "आखिर" उड़ान आये ॥
॥आखिर॥
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें