चले आओ इधर की अब वहां रहना नहीं है
दरिंदों से भरी दुनिया में अब जीना नहीं है
हरी अब आ भी जाओ और करो संघार दुष्टों का
कि इनकी वहशियत की अब कोई सीमा नहीं है ॥
॥आखिर॥
दरिंदों से भरी दुनिया में अब जीना नहीं है
हरी अब आ भी जाओ और करो संघार दुष्टों का
कि इनकी वहशियत की अब कोई सीमा नहीं है ॥
॥आखिर॥
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें