रविवार, 19 अक्टूबर 2014

प्यार मेरा भी सच्चा लगता है

तेरे संग उठती हर सुबह मेरी तुम ना हो तो हो शाम
तेरे बिन मुझको यूँ लगता है जैसे हो सिय बिन राम
यूँ तेरा हर सपने में आना अच्छा लगता है
तुम साथ जो हो तो प्यार मेरा भी सच्चा लगता है ॥

तुम यूँ आये जीवन मेरे जैसे वन में हरियाली हो
तुम तीज मेरी त्यौहार मेरे जीवन की तुम दीवाली हो
सूने जीवन में खुशियां आना अच्छा लगता है
तुम साथ जो हो तो प्यार मेरा भी सच्चा लगता है  ॥

ना देखा है मैंने खुद को कई बरसों से आईने में
तेरी आँखों में ही दिखा हूँ मैं बसता हूँ तेरे सीने में
तेरी परछाईं में खुद को पाना अच्छा लगता हैं
तुम साथ जो हो तो प्यार मेरा भी सच्चा लगता है ॥

मैं करता हूँ बस प्यार तुम्हे तुम जग में सबसे प्यारी हो
जैसे हूँ मैं तेरा "श्याम" प्रिये , तुम मेरी "राधा" प्यारी हो
तुमसे हर पल मिलना हमे कितना अच्छा लगता है
तुम साथ जो हो तो प्यार मेरा भी सच्चा लगता है ॥

तुम बिन ना जाने क्या होगा मेरा इस दुनिया में "आखिर"
तुम सा तो कोई मिलेगा नहीं हो जाऊंगा फिर मैं काफिर
तेरे प्यार में वो ऊपर वाला भी सच्चा लगता है
तुम साथ जो हो तो प्यार मेरा भी सच्चा लगता है ॥

॥आखिर॥ 

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