जीना है जीभरकर इसको अपना यही फ़साना है
कुछ खुशियां थोड़े गम पीकर "आखिर" तो मर जाना है ॥
॥आखिर॥
कुछ खुशियां थोड़े गम पीकर "आखिर" तो मर जाना है ॥
॥आखिर॥
वो जो आसमान में तारे टिमटिमा रहे हैं बहुत दूर हैं शायद , सारे टिमटिमा रहे हैं ॥ कल तक जो दिखते ना थे अंदर से वो जुगनू आज सारे जगमगा रहे हैं ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें