मंगलवार, 23 सितंबर 2014

जाने क्या बात है ?

वो दूर जा रही है अब ! जाने क्या बात है ?
नज़रें चुरा रही है अब ! जाने क्या बात है ?
जो कल तलक हर राज़ बयां करती थीं मुझसे
कुछ तो छुपा रहीं हैं अब ! जाने क्या बात है ?

हूँ मैं वही अब भी मगर ! जाने क्या बात है ?
है प्यार का सफर वही , जाने क्या बात है ?
अब भी धधक रही है इधर आग प्यार की
है बुझ रही शमा उधर , जाने क्या बात है ?

हैं दिन मेरे गुमनाम अब , जाने क्या बात है ?
हैं रातें भी सुनसान अब , जाने क्या बात है ?
करता हूँ आज भी मैं चाँद से तेरी बातें
है खुद पे ही विश्वास काम , जाने क्या बात है ?


॥आखिर॥ 

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