यूँही गुमसुम सी वो चुपचाप चलती रहती है
अपने दमन में हर एक पल संजोति रहती है
कभी देकर ख़ुशी हमको कभी गम देकर के
ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है ॥
मेरी मेहनत का सिला मुझको देती रहती है
कामचोरी पे सजा भी दिलाती रहती है
जब चमकता नहीं किस्मत का सितारा अपना
पास आती है , बैठती है , बातें करती है
कहती है हार न मनो पथिक तुम आगे बढ़ो
कई शंघर्षो से भरा तुम्हारा जीवन है
ख़ुशी देकर , सजा , व हौसले को देते हुए
ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है ॥
उगते सूरज की हर किरण में समायी वो है
दोपहर की भरी गर्मी में समायी वो है
शाम की लालिमा माथे की बिंदी है उसकी
रात की चांदनी में से भीगी , नहायी वो है
इस तरह चाँद को सूरज से यूँ मिलते हुए
ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है ॥
वो है गर्मी में चलती लू के थपेड़ो जैसी
वो है बरसात के मौसम की पहली बूंदों सी
उसमे है शरद की शीतलहरी सी शीतलता
वो है फाल्गुन में बहती शरारती हवा जैसी
यूँही मौसम के हर एक रंग में बदलते हुए
ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है ॥
॥आखिर॥
अपने दमन में हर एक पल संजोति रहती है
कभी देकर ख़ुशी हमको कभी गम देकर के
ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है ॥
मेरी मेहनत का सिला मुझको देती रहती है
कामचोरी पे सजा भी दिलाती रहती है
जब चमकता नहीं किस्मत का सितारा अपना
पास आती है , बैठती है , बातें करती है
कहती है हार न मनो पथिक तुम आगे बढ़ो
कई शंघर्षो से भरा तुम्हारा जीवन है
ख़ुशी देकर , सजा , व हौसले को देते हुए
ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है ॥
उगते सूरज की हर किरण में समायी वो है
दोपहर की भरी गर्मी में समायी वो है
शाम की लालिमा माथे की बिंदी है उसकी
रात की चांदनी में से भीगी , नहायी वो है
इस तरह चाँद को सूरज से यूँ मिलते हुए
ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है ॥
वो है गर्मी में चलती लू के थपेड़ो जैसी
वो है बरसात के मौसम की पहली बूंदों सी
उसमे है शरद की शीतलहरी सी शीतलता
वो है फाल्गुन में बहती शरारती हवा जैसी
यूँही मौसम के हर एक रंग में बदलते हुए
ज़िन्दगी हमसे हर कदम पे मिलती रहती है ॥
॥आखिर॥
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