ज़िन्दगी फिर उन्ही रास्तों पर ले आई मुझे
जहाँ से मैंने चलना सीखा था
तेरे चेहरे से हँसना और
तेरी बाहों में रोना सीखा था ||
पर आज तेरे बगैर वो सब अधूरा लगता है
दिल ये बेचैन मुझे पागल पूरा लगता है
यूँ तो मैं सोता नहीं रातों ये जान कर
की गर नींद आई तो तुझसे मिलना अधूरा लगता है ||
कुछ यूँ मुसल-सल मुझे तेरी याद आती है
मजबूर मेरे दिल को विचलित कर जाती है
हर वक़्त बस तेरा तसव्वुर इन आँखों को रहता है
और पूछने पर हर बार दिल बस यही कहता है :
कि
लोग मिलते हैं , मिल के इकरार होता है
आँखों ही आँखों में चुपके से इज़हार होता है
कि जब तक आँख से मोती गिरे न तेरी यादों में
मेरी मनो तो तब जाके किसी से प्यार होता है ||
ahem ahem,.,
जवाब देंहटाएं