रविवार, 21 फ़रवरी 2016

लोकतंत्र ही आफत है २

इतने सुंदर देश की लोगों ने कर दी क्या हालत है
यूँ लगता है लोकतंत्र में लोकतंत्र ही आफत है।।

आओ गाली दें दूजे को क्योंकि हम आज़ाद हैं
आओ काटें एक दूजे को क्योंकि हम आज़ाद हैं
आओ मिलकर फूंक दें सारी गलियों की आबादी को
आओ तोड़ें भारत माँ को क्योंकि हम आज़ाद हैं
लोकतंत्र में आज़ादी हसरत थी अब ये आफत है
यूँ लगता है लोकतंत्र में लोकतंत्र ही आफत है।।

यहाँ मिली मुझको आज़ादी के मैं खुलकर बोल सकूं
डरूं नहीं मैं किसी तंत्र से राज़-ए-दिल मैं खोल सकूं
पर इसका क्या ये मतलब है कि 'माँ' तुझको गाली दूं
तुझको छलनी किया था उन अफज़ल-कसाब को ताली दूं
इन फूहड़ बातों पर भी आखिर क्यों होती सियासत है
यूँ लगता है लोकतंत्र में लोकतंत्र ही आफत है।।

बापू ने था मार्ग दिखाया अपना काम बनाने का
बिना लड़े बस सत्याग्रह कर अपनी बात मनाने का
तब अंग्रेज थे अब हम खुद अपनी सरकार से लड़ते हैं
सत्याग्रह की आड़ में एक-दूजे को मारे फिरते हैं
कभी रोकते हैं सड़कों को कभी जलाते अड्डे हैं
इस तरह खुद के विकास हम ही खोदते गढ्ढे हैं
कुछ का इसमें स्वार्थ निहित है बाकी सब की आफत है
यूँ लगता है लोकतंत्र में लोकतंत्र ही आफत है।।

छोटे-छोटे हर मसले को ले सड़कों पर आते हैं
दूजों का नुकसान करा कर अपना काम बनाते हैं
जब ऐसे भी काम ना बनता तब समझो की पंगा है
तब मज़हब,जाती के नाम पर लोग कराते दंगा हैं
ऐसे में जाती निरीह और बेकसूर की जान है
ऐसे में बरबस बेबस सा हो जाता इंसान है
आजादी की आड़ में होती अब हिंसा की इबादत है
यूँ लगता है लोकतंत्र में लोकतंत्र ही आफत है।।

खोते हैं सैनिक अब भी सरहद के तूफान में
मरते हैं कर्जों में दबकर खेतिहर हिंदुस्तान में
पर हमको इनकी क्या चिंता हम तो चैन से सोए हैं
हम आरक्षण हम आज़ादी के मुद्दे में खोए हैं
और उस पर ये नीच सियासत के सेनानी बकते हैं
जिसको सुनकर कितनों के दिल खून के आँसू रोए हैं
जिनके कारण ज़िंदा हैं उनको जब भूले सियासत है
तब लगता है लोकतंत्र में लोकतंत्र ही आफत है।।

यूँ तो शांत है देश मेरा पर जब ये देवी आती है
खो जाती है सहनशीलता जाने क्या कर जाती है
इनके आने पर कुछ खुद को बुद्धिजीवी कहते हैं
कुछ इनके स्वागत में फिर सम्मान गिराने लगते हैं
इन सब कुछ की आड़ में हो जाता है जीवन खून भरा
अब्र से गिरते हैं शोले धू-धू कर जल जाती है धरा
ये सब होता है जब-जब होती चुनाव की आहट है
तब लगता है लोकतंत्र में लोकतंत्र ही आफत है।।

।।आखिर।।

5 टिप्‍पणियां:

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