जमाने की हर बात को हम हँस कर उड़ा देते हैं
यूँ हम अपने जीने का माहौल बना लेते हैं।।
गुस्ताखियाँ बहुत करती है जिंदगी मगर
हम उसकी हर गलती को अपना बना लेते हैं।।
तेरा मजहब मेरे मजहब से अलग है तो क्या
जब कभी मिलता है सीने से लगा लेते हैं।।
हमें तो प्यार से जीने की है आदत "आखिर"
हम नहीं लड़ते हमें नेता लड़ा देते हैं।।
।।आखिर।।
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