शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

मेरी हसरत

अभी कैसे बताऊँ क्या मेरे इस दिल की हसरत है
ज़रा जीने की हसरत है ज़रा मरने की हसरत है ॥

ज़माने में मेरा अब तक कोई वजूद भी है क्या ?
अदब से नाम ले मेरा ज़माना इतनी हसरत है ॥

कभी कोई गुलाब मेरे भी जीवन को महकाए
किसी के प्यार में खुद को भुला जाने की हसरत है ॥

जहाँ में हो फकत  मेरी वफादारी के ही चर्चे
किसी के साथ पूरी ज़िन्दगी जीने की हसरत है ॥

वो जिसके स्पर्श से हमको मिले जन्नत सी हर खुशियां
हा एक बच्चे की उंगलियां पकड़ चलने की हसरत है ॥

वो जिन लोगो की बिन मेरी शराफत शून्य लगती है
मेरे माता पिता हो खुश मेरी इतनी सी हसरत है ॥

मेरा ओहदा नहीं कर्तव्य हो पहचान इस जग में
मुझे हो चाहने वाले जहाँ में इतनी हसरत है ॥

की हसना और हँसाना बस मेरी फितरत रहे "आखिर"
मेरी मैयात में हँसता हर कोई आये ये हसरत है ॥


॥आखिर॥ 

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