प्यार इसी को कहते है शायद !
जिसमे कुछ बोले बिना हर बात होती है
मैं इशारे में इज़हार करता हूँ
वो इशारे में इकरार करती है
प्यार इसी को कहते है शायद !
जिसमे न जाने कब दिन कब रात होती है
वक़्त का पता ही कहाँ चलता है
ख़्वाबों में भी तो उनसे बात होती है
प्यार इसी को कहते है शायद!
जिसमे कुछ पाना नहीं बस खोना अच्छा लगता है
उसके अक्स को आँखों में संजोना अच्छा लगता है
महफ़िलों का शोर सुनाई देता कहाँ हमे
इसमें तो तन्हाई में रोना अच्छा लगता है ।
प्यार इसी को कहते हैं "आखिर"
जिसमे अपना सब कुछ उसके नाम होता है
अरे बस यार का नाम रहता है ज़ुबान पर
आशिक तो गुमनाम होता है ।
प्यार इसी को कहते हैं शायद!
wahh !!!
जवाब देंहटाएंThanks bhai...:)
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