रविवार, 28 अगस्त 2016

खुदगर्ज

बड़ा खुदगर्ज सा मैं हो गया हूँ इश्क में शायद
कि अपनी ज़िद की खातिर मैंने उनका दिल दुखाया है।।

जो हर पल चाहते थे मेरे हँसने का सबब बनना
उन्ही को मैने अपनी हरकतों से अब रुलाया है।।

वो मुझको माफ कर देगा ये मैं जानता हूँ पर
मैं खुद को माफ ना कर पाउंगा ये सच बताया है।।

नज़र अब मैं मिला ना पाउंगा उससे कभी शायद
कि मैंने खुद को अपनी नज़रों में कुछ यूँ गिराया है।।

मुझे मालूम है वो जा रहा है दूर अब "आखिर"
उसे किस हक से रोकूं मैने जिसको कल रुलाया है।।

।।आखिर।।

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